हमारे देश में बहुत से लोग मकान, दुकान, पुल और सड़कें बनाने का काम करते हैं। इन लोगों को हम निर्माण मजदूर या बांधकाम कामगार कहते हैं। यह लोग दिन-रात कड़ी मेहनत करके सुंदर इमारतें खड़ी करते हैं। काम करते समय कई बार इन्हें चोट लगने का डर रहता है या धूल-मिट्टी के कारण ये बीमार भी हो सकते हैं।
जब ये बीमार होते हैं, तो इनके पास डॉक्टर की फीस देने या अच्छी दवाइयां खरीदने के पैसे नहीं होते। इसी बात को ध्यान में रखकर महाराष्ट्र सरकार ने एक बहुत अच्छी योजना शुरू की है। इस योजना का नाम बांधकाम कामगार आरोग्य योजना है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य गरीब मजदूरों को बीमारी के समय मुफ्त इलाज और पैसों की मदद देना है ताकि वे बिना किसी चिंता के अपना इलाज करा सकें। यह योजना वहुत ही बढ़िया योजना है
इस योजना के अंतर्गत जो भी लाभ होता है वो सीधा बैंक खाते में ट्रांसफर कर दिया जाता है
इस योजना के मुख्य लाभ और मिलने वाली आर्थिक सहायता
बांधकाम कामगार आरोग्य योजना के तहत कामगारों को बहुत सारे फायदे मिलते हैं। इस योजना का सबसे बड़ा लाभ यह है कि इसके अंतर्गत आने वाले अस्पतालों में मजदूरों का कैशलेस इलाज होता है यानि की आपका बिना पैसो के मुफ्त में इलाज होता है। कैशलेस इलाज का मतलब होता है कि अस्पताल में भर्ती होने पर आपको अपनी जेब से एक भी रुपया नहीं देना पड़ता। डॉक्टर की फीस, दवाइयों का खर्च, खून की जांच, एक्स-रे और ऑपरेशन का पूरा खर्च सरकार खुद उठाती है।
इससे गरीब मजदूरों को बीमारी के समय किसी से पैसे उधार लेने की जरूरत नहीं पड़ती और वे अच्छे से अच्छे अस्पताल में अपना इलाज करवा पाते हैं।
इसके अलावा इस योजना में महिलाओं के स्वास्थ्य का भी विशेष ध्यान रखा गया है। अगर किसी पंजीकृत महिला मजदूर या किसी पुरुष मजदूर की पत्नी के घर में बच्चे का जन्म होता है, तो सरकार आर्थिक मदद देती है। सामान्य रूप से बच्चे के जन्म यानी नॉर्मल डिलीवरी के समय सरकार की तरफ से 15,000 रुपये की सहायता दी जाती है।
वहीं अगर डॉक्टर को ऑपरेशन करके बच्चे का जन्म कराना पड़े, जिसे सिजेरियन डिलीवरी कहते हैं, तो सरकार 20,000 रुपये की मदद सीधे बैंक खाते में भेजती है। यह लाभ मजदूर के पहले दो बच्चों के जन्म के समय दिया जाता है ताकि मां और बच्चे को अच्छा खाना और दवाई मिल सके।
इस योजना के तहत मजदूरों के स्वास्थ्य की नियमित जांच भी की जाती है। इसके लिए जगह-जगह पर मुफ्त स्वास्थ्य शिविर यानी हेल्थ कैंप लगाए जाते हैं। इन कैंपों में जाकर मजदूर अपनी आंखों की जांच, खून की जांच और अन्य जरूरी टेस्ट बिल्कुल मुफ्त में करवा सकते हैं।
अगर किसी मजदूर को काम के दौरान कोई गंभीर चोट लग जाती है और वह हमेशा के लिए दिव्यांग हो जाता है, तो उसे सरकार की तरफ से 2,00,000 रुपये की बड़ी आर्थिक मदद दी जाती है। साथ ही अगर किसी मजदूर की पहली बेटी के जन्म के बाद माता-पिता परिवार नियोजन का ऑपरेशन करवा लेते हैं, तो सरकार उस बेटी के नाम पर बैंक में 1,00,000 रुपये की रकम जमा करती है, जो बेटी के 18 साल की होने पर उसे मिलती है।
योजना का लाभ लेने के लिए जरूरी योग्यता
ऐसी योजना का लाभ हर किसी को नहीं मिलता है सूचना का लाभ केवल उन्हें मजदूरों को मिलेगा जो कामगार योजना के अंतर्गत रजिस्टर्ड है जो जिनको सच में पैसों की जरूरत है जो सच में दिन भर मजदूरी का काम करते है चाहे वह कोई भी मजदूरी का काम हो
दूसरी जरूरी शर्त उम्र को लेकर है। इस योजना में रजिस्ट्रेशन कराने के लिए मजदूर की उम्र कम से कम 18 साल होनी चाहिए और ज्यादा से ज्यादा 60 साल होनी चाहिए। 18 साल से कम उम्र के बच्चों और 60 साल से अधिक उम्र के बुजुर्गों का रजिस्ट्रेशन इस बोर्ड में नहीं किया जाता है। इसके अलावा एक और बहुत महत्वपूर्ण नियम यह है कि मजदूर ने पिछले 12 महीनों यानी पिछले एक साल में कम से कम 90 दिनों तक निर्माण मजदूर के रूप में काम किया हो। इसके लिए उसे ठेकेदार या संबंधित अधिकारी से 90 दिन काम करने का एक प्रमाण पत्र लिखवाकर देना होता है।
आवेदन करने के लिए आवश्यक दस्तावेज
अगर कोई मजदूर इस योजना से जुड़ना चाहता है और मुफ्त इलाज का लाभ उठाना चाहता है, तो उसे आवेदन करते समय कुछ जरूरी कागज जमा करने होते हैं। इन कागजों को देखकर ही सरकार यह तय करती है कि सामने वाला व्यक्ति सचमुच गरीब मजदूर है या नहीं। सबसे पहले मजदूर के पास उसका आधार कार्ड होना चाहिए। आधार कार्ड से मजदूर की सही पहचान और उसका पता मालूम चलता है। इसके साथ ही एक आयु प्रमाण पत्र की जरूरत होती है, जिसके लिए स्कूल छोड़ने का सर्टिफिकेट या जन्म प्रमाण पत्र का उपयोग किया जा सकता है।
इसके बाद सबसे जरूरी कागज होता है 90 दिन काम करने का सर्टिफिकेट। यह सर्टिफिकेट इस बात का पक्का सबूत होता है कि उस व्यक्ति ने एक साल में 90 दिन मजदूरी का काम किया है। इसके साथ ही मजदूर को अपना राशन कार्ड और अपने निवास का प्रमाण पत्र भी देना होता है। चूंकि सरकार सहायता राशि सीधे बैंक खाते में भेजती है, इसलिए मजदूर के पास एक बैंक खाता होना बहुत जरूरी है। आवेदन के समय बैंक की पासबुक के पहले पन्ने की फोटोकॉपी जमा करनी होती है, जिसमें खाता संख्या और आईएफएससी कोड साफ-साफ दिखाई दे। अंत में मजदूर को अपनी तीन पासपोर्ट साइज रंगीन फोटो भी लगानी होती है।
योजना के लिए आवेदन कैसे करें
बांधकाम कामगार आरोग्य योजना का लाभ उठाने के लिए सबसे पहले मजदूर को अपना रजिस्ट्रेशन महाराष्ट्र इमारत और अन्य निर्माण श्रमिक कल्याण बोर्ड में कराना होता है। इसके लिए आवेदन करने के दो तरीके हैं। पहला तरीका ऑनलाइन है और दूसरा तरीका ऑफलाइन है।
थोड़े पढ़े लिखे हैं या आपके पास स्मार्टफोन है, आप खुद भी ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं इसके लिए आपको कहीं और जाने की आवश्यकता नहीं है आप ऑफीशियली वेबसाइट पर जाकर आवेदन कर सकते हैं बहुत ही आसान प्रक्रिया है
वेबसाइट पर क्लिक करने के बाद एक फॉर्म खुलता है, जिसमें मजदूर को अपना नाम, मोबाइल नंबर, पता और अपनी उम्र जैसी सभी जानकारियां बिल्कुल सही-सही भरनी होती हैं। इसके बाद ऊपर बताए गए सभी जरूरी दस्तावेजों को स्कैन करके वेबसाइट पर अपलोड करना पड़ता है।
फॉर्म पूरा भरने के बाद उसे सबमिट कर देना होता है। इसके बाद सरकार के अधिकारी आपके फॉर्म की जांच करते हैं। अगर सब कुछ सही पाया जाता है, तो आपका रजिस्ट्रेशन मंजूर हो जाता है और आपको एक स्मार्ट कार्ड यानी कामगार पहचान पत्र मिल जाता है।
मोबाइल या इंटरनेट का इस्तेमाल करना नहीं आता है तो आपको परेशान होने की जरूरत नहीं है आप अपने पास के किसी भी कॉमन सर्विस सेंटर में जाकर या फिर नजदीकी सरकारी श्रम कार्यालय आने के लिए और ऑफिस में जाकर भी आप ऑफलाइन आवेदन कर सकते हैं
इसके अलावा मजदूर अपने गांव या शहर के पास स्थित कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) या महा-ई-सेवा केंद्र पर भी जा सकता है। वहां जाकर वह केंद्र के संचालक को अपने सारे असली दस्तावेज दे सकता है। केंद्र का संचालक बहुत ही कम फीस लेकर मजदूर का फॉर्म ऑनलाइन भर देता है। फॉर्म जमा होने के बाद कुछ दिनों में मजदूर का लेबर कार्ड बनकर आ जाता है, जिसे दिखाकर अस्पतालों में मुफ्त इलाज कराया जा सकता है।
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Conclusion
आज के समय में बंद कामगार आरोग्य योजना के अंतर्गत महाराष्ट्र सरकार करोड़ों लाखों वस्तुओं को इसका लाभ दे रही है क्योंकि सबसे ज्यादा खर्च की तो किसी मजदूर का होता है तो वह अस्पताल में होता है आज के समय में अस्पताल की किसी और जानवर हो गई है अगर आपको अस्पतयेगा करके काफी ज्यादा बढ़ जाता है दूसरी सरकार मुफ्त में इलाज की सुविधा दे रही है
क्योंकि अगर कोई मजदूर बीमार पड़ जाता है तो वह अपना काम तो कर ही नहीं पता जैसे उसके परिवार को परेशानी उठानी पड़ती के साथ में फिर जो हॉस्पिटल का खर्चा होता है तो सरकार ने की समस्या को समझा और इस सूचना को लांच कर दिया जिससे मुफ्त इलाज कर दिया जाता है इससे गरीबों की मजदूरों के जीवन स्तर में काफी सुधार आया है